गौशाला सुरक्षा मिशन

“गौमाता ही राष्ट्र माता“

“गाय सेवा ही सनातन धर्म सेवा“

“एक परिचय“
मित्रों गौमाता है सबसे बड़ा धन ! आओ इसकी रक्षा करें हम!!

गौ माता ही सनातन धर्म की जङ है:-

संस्थान के प्रमुख कल्याणकारी मुद्दे:

पशुपालन, डेयरी और वृद्ध/बुजुर्ग, कृषि, कला और संस्कृति, जैव प्रौद्योगिकी, बच्चे, नागरिक मुद्दे, दिव्यांगजन, आपदा प्रबंधन, दलित उत्थान, पेयजल, शिक्षा और साक्षरता, पर्यावरण और वन, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, एचआईवी/एड्स, आवास, मानवाधिकार, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, कानूनी जागरूकता और सहायता, श्रम और रोजगार, भूमि संसाधन, सूक्ष्म वित्त (एसएचजी), अल्पसंख्यक मुद्दे, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम……

परिचालन क्षेत्र-राज्य:

अंडमान और निकोबार द्वीप, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, उड़ीसा, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल

मित्रों अपनी जीवनशैली पर खर्च का केवल 5% अपनी अपनी इस धरती माँ तथा गौमाता के लिए इन्वेस्टमेंट करें जो भविष्य के लिए एक तोहफा होगा. देशभर में 100 करोड़ बांस पौधे लगाने का “लक्ष्य प्राप्ति 10 साल”

गौ माता व पर्यावरण को बांस पेड़ ही बचा सकता है;-

पर्यावरण बचेगा तो मानव बचेग! गाय बचेगी तो सनातन बचेगा!!

गौ स्मृति वन ऑक्सीजन पार्क में एक बांस लगाएँ कार्बन क्रेडिट के साथ 50% तक पर्यावरण सुरक्षा लाभ पाएँ…

बांस का एक पेड़ 100 साल के अपने जीवनकाल में मानव को प्रति वर्ष लगभग 70 टन ऑक्सीजन दे सकता है साथ ही प्रति वर्ष 80 टन कार्बन डाइ ऑक्साइड को अवशोषित कर सकता है। बांस जमीन में पानी का जल स्तर बढाकर भूमी को उपजाऊ बना सकता है |

बांस पौधा रोपण में आपका सहयोग लाखों गायो का जीवन बचा सकता है.

इस परियोजना में विस्तार के लिए लाखों युवा योगदान दे सकते हैं

हमारे प्रेरणादायक

स्वामी विवेकान्द जी ने एक बार कहा था कि युवाओं अपनी जवानी में जंक मत लगने दो धरती का सीना चीरकर अवसर पैदा करो कामयाबी आपके कदम चूमेगी|

इस प्रकृति में इतनी शक्ति है किमानव की हर जरूरत को पूरा कर सकती है,लेकिन मानव की जरूरत से ज्यादा लालच को यह प्रकृति हमारी धरती माता कभी भी पूरा नही कर सकती है | आज यह प्रकृति हमारी धरती माता हमें पुकार रही है किमुझे बचा लो मेरा चीर हरण हो रहा है मै तुम्हारी हर जरूरत को पूरा करूगीं घर धन से भर दूगीं,

युवाओं अपने लक्ष्य को साधने में लग जाओ, अब कामयाबी अवश्य मिलेगी.

गौसेवा का बीड़ा उठा लीजिए!

गौरक्षा का डंका बजा दीजिए!!

अच्युत मुनि गौशाला / पर्यावरण सुरक्षा बोर्ड की पृष्ठभूमी:-

गाय पालन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घर को गौशाला कहते हैं। हिंदू धर्म में गाय को माता माना जाता है और उसकी हर तरह से सेवा और सुरक्षा करना पुण्य का काम माना जाता है। भारत में कई गौशालाएँ हैं, सरकार भी इन्हें चलाने के लिए पैसा देती है और गौ प्रेमी दान भी करते हैं, कुछ अमीर लोग भी गौशालाएँ चलाते हैं। गौशालाएँ ज़्यादातर भारत के गाँवों में पाई जाती हैं। आज भी भारत के गाँवों के लोग जब सुबह रोटी बनाते हैं, तो तवे से पहली रोटी गाय को खिलाते हैं, और फिर अपने बच्चों और परिवार को देते हैं।

गौशालाओं की अवधारणा:-

हमारे देश की 70% से अधिक जनसंख्या गाय को पूजती है। यद्यपि देश की गौवंशीय जनसंख्या में देशी गौवंश का प्रभुत्व है, फिर भी संकर नस्ल के गौवंशीय पशुओं की जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे हमारे देशी गौवंशीय पशुओं की आनुवंशिक विविधता को खतरा है। देश में आवारा गौवंशीय पशुओं की बड़ी संख्या एक और समस्या है और उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। गौशालाएँ लगातार बढ़ती आवारा गौवंशीय जनसंख्या के प्रबंधन और हमारे बिगड़ते आनुवंशिक आधार के संरक्षण के लिए एक अच्छा विकल्प हैं। हाल के वर्षों में आवारा पशुओं की समस्या ने चिंताजनक रूप धारण कर लिया है और राजनीतिक आयाम भी ग्रहण कर लिए हैं। देश में आवारा पशुओं की अनुमानित संख्या 45-55 लाख है। अवांछित नर और बांझ, वृद्ध और अशक्त मादा मवेशियों को, जिनकी किसानों के लिए कोई वैकल्पिक उपयोगिता नहीं है और जिनका कोई बाजार मूल्य नहीं है, उनके मालिक गुप्त रूप से छोड़ देते हैं। अवैध व्यापार पर शिकंजा कसने और अनधिकृत बूचड़खानों के बंद होने से, खासकर उत्तरी और मध्य भारतीय राज्यों में,यह समस्या और भी बदतर हो गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में फैसला सुनाया कि यह समस्या संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त शहरवासियों के जीने के अधिकार का उल्लंघन है। इन जीवों के निपटान की कोई उचित व्यवस्था न होने के कारण, धार्मिक दान-संस्थाएँ आगे आईं और गौ-रक्षा आश्रयों की स्थापना की — जिन्हें आज हम गौशालाएँ कहते हैं। कई गौशालाओं ने अपना उद्देश्य काफी अच्छी तरह पूरा किया और कुछ का आकार बढ़ा, विविधता आई और वे अपने आप में एक संस्था बन गईं। कुछ को स्थानीय समुदायों का समर्थन मिला; जबकि कई अन्य सीमित संसाधनों के कारण हाशिए पर ही रहीं। हाल के दिनों में, आवारा पशुओं की भारी आमद के कारण, इनमें से अधिकांश गौशालाएँ भीड़भाड़ वाली हो गई हैं और इन पशुओं के उचित रखरखाव और भरण-पोषण के लिए पर्याप्त स्थान, धन, मानव संसाधन और अन्य सुविधाओं/संसाधनों का अभाव है।

बांस पौधा रोपण में आपका सहयोग लाखों गायो का जीवन बचा सकता है,

गाय पालन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले घर को गौशाला कहते हैं। हिंदू धर्म में गाय को माता माना जाता है और उसकी हर तरह से सेवा और सुरक्षा करना पुण्य का काम माना जाता है। भारत में कई गौशालाएँ हैं, सरकार भी इन्हें चलाने के लिए पैसा देती है और गौ प्रेमी दान भी करते हैं, कुछ अमीर लोग भी गौशालाएँ चलाते हैं। गौशालाएँ ज़्यादातर भारत के गाँवों में पाई जाती हैं। आज भी भारत के गाँवों के लोग जब सुबह रोटी बनाते हैं, तो तवे से पहली रोटी गाय को खिलाते हैं, और फिर अपने बच्चों और परिवार को देते हैं।

देश में बिगडते पर्यावरण की समस्या का समाधान सम्भव हो सकता है.

लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा तथा देश प्रदुषण मुक्त हो सकेगा.

पर्यावरण बचेगा, तो मानव बचेगा.. तथा राज्य सरकारों का राजस्व भी बढ़ेगा.

आज विश्व में बिगड़ते पर्यावरण के कारण गिरता जलवायु का स्तर एक चिंता का विषय बन गया है आज दिल्ली जैसे शहर की खुली हवा में साँस लेना मुश्किल हो गया है | समय रहते अगर इस समस्या के समाधान पर ध्यान ना दिया गया तो स्थिति इतनी विष्फोटक हो सकती है जिसकी हम कल्पना भी नही कर सकते | देश में पर्यावरण सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा परियोजना के अंतर्गत अच्युत मुनि गौशाला/पर्यावरण सुरक्षा बोर्ड सम्पूर्ण भारत में खाली पड़ी बेकार भूमी पर आर्टिजन एग्रो इन्डिया प्राइवेट लिमिटेड तथा समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से राज्य के सभी स्कूलों में पर्यावरण बचेगा,मानव बचेगा जागरूकता मिशन चलाना चाहती है तथा जन सहयोग से हर गौशाला की खाली पड़ी भूमी पर 10000 बांस पौधों का एक “गौस्मृति वन आक्सीजन पार्क” बनाना चाहती है| जिससे गौशालाओं की आमदनी बढ़ने के साथ गौवंस को सुध वातावरण मिलेगा तथा लाखों गौशालाओ का होगा विकास भक्तों को मिलेगा सुंदर वातावरण लाखों युवाओं को मिलेगा रोजगार जो देश के विकास में दे सकते हैं योगदान…

“अच्युत मुनि गौशाला व पर्यावरण सुरक्षा बोर्ड”

गौ स्मृति वन आक्सीजन पार्क में

“एक बांस पेड़ गौमाता के नाम”

स्थान:-1-अच्युत मुनि आश्रम करणवास अनूपशहर यू पी.

2- श्री राम जन्मभूमि 84 कोसी परिक्रमा मार्ग

3- श्री कृष्ण जन्मभूमि ब्रज 84 कोसी परिक्रमा मार्ग

प्रधानमन्त्री जी की महत्वपूर्ण योजना

बांस का एक पेड़ 100 साल के अपने जीवनकाल में मानव को प्रति वर्ष लगभग 70 टन ऑक्सीजन दे सकता है साथ ही प्रति वर्ष 80 टन कार्बन डाइ ऑक्साइड को अवशोषित कर सकता है। बांस जमीन में पानी का जल स्तर बढाकर भूमी को उपजाऊ बना सकता है |

अपने बच्चों को पर्यावरण ज्ञान कराएं ! बच्चों के हाथों से उनके जन्मदिन पर 5 बांस पौधे लगाएं ! आजीवन गौ उत्पाद पर 10% तक पर्यावरण सुरक्षा लाभ पायें !

** मन्दिर में भगवान की सेवा करने से त्रिलोकीनाथ की सेवा हो सकती है!! लेकिन निष्काम भाव से गाय की सेवा करने से विश्वमात्र की सेवा हो जाती है!!

** कहते हैं कि जो गौमाता के खुर से उड़ी हुई धूलि को सिर पर धारण करता है,वह मानों तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पाता है।

**गौ माता का जंगल से घर वापस लौटने का संध्या का समय (गोधूलि वेला) अत्यंत शुभ एवं पवित्र है। गाय का मूत्र गो औषधि है। मां शब्द की उत्पत्ति गौ मुख से ही हुई है। मानव समाज में भी मां शब्द कहना गाय से सीखा है। जब गौ वत्स रंभाता है तो मां शब्द गुंजायमान होता है।

हरी हर लेगें आपके जीवन की सब पीड़ा, आओ मिलकर उठाएं गौसंवर्धन का बीड़ा,,,

गौ माता व पर्यावरण को बांस पेड़ ही बचा सकता है”

गौ माता ही सनातन धर्म की जङ है:-

**आज भी कई घरों में गाय की पहली रोटी निकाली जाती है। कई स्थानों पर संस्थाएं गौशाला बनाकर पुनीत कार्य कर रही है,जो कि प्रशंसनीय कार्य है।

** जब हम किसी अत्यंत अनिवार्य कार्य से बाहर जा रहे हों सामने गाय माता के इस प्रकार दर्शन हो जब वह अपने बछड़े या बछिया को दूध पिला रही हो तो समझ जाना चाहिए की जिस काम के लिए हम निकले हैं वह कार्य अब निश्चित ही पूर्ण होगा।

“एक बांस पेड़ गौ माता के नाम”

मित्रों अपनी जीवनशैली पर खर्च का केवल 5% अपनी गौमाता के लिए इन्वेस्टमेंट करें जो भविष्य के लिए एक तोहफा होगा…

आपका एक सहयोग लाखों गायो का जीवन बचा सकता है…

गौ माता व पर्यावरण को बांस पेड़ ही बचा सकता है

बांस पौधा रोपण में आपका सहयोग लाखों गायो का जीवन बचा सकता है,

**प्राचीन ग्रंथों में सुरभि (इंद्र के पास),कामधेनु(समुद्र मंथन के 14 रत्नों में एक),पदमा,कपिला आदि गायों का महत्व बताया है।

**जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देवजी ने असि, मसि व कृषि गौ वंश को साथ लेकर मनुष्य को सिखाए। कि हमारा पूरा जीवन गाय पर आधारित है।

गौमाता है सबसे बड़ा धन ! आओ इसकी रक्षा करें हम !!

गौ माता का जीवन जितना लम्बा होगा मानव का जीवन उतना ही दीर्घायु होगा…

गौ माता ही सनातन धर्म की जङ है:-

** गाय की प्रदक्षिणा करने से चारों धाम के दर्शन लाभ प्राप्त होता है, क्योंकि गाय के पैरों में चारो धाम है।

देसी गाय माता का दूध गुणात्मक दृष्टि से अच्छा होने के बावजूद कम मात्रा में प्राप्त होता है।

** दूध अधिक मिले इसके लिए कुछ लोग गाय और भैंस का दूध क्रूर और अमानवीय तरीके से निकालते हैं। गाय का दूध निकालने से पहले यदि बछड़ा/बछिया हो तो पहले उसे पिलाया जाना चाहिए। वर्तमान में लोग बछड़े/बछिया का हक कम करते है। साथ ही इंजेक्शन देकर दूध बढ़ाने का प्रयत्न करते हैं, जो की उचित नहीं है। **प्राचीन ग्रंथों में सुरभि (इंद्र के पास), कामधेनु (समुद्र मंथन के 14 रत्नों में एक), पदमा, कपिला आदि गायों का महत्व बताया है। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देवजी ने असि, मसि व कृषि गौ वंश को साथ लेकर मनुष्य को सिखाए। कि हमारा पूरा जीवन गाय पर आधारित है। ** शिव मंदिर में काली गाय के दर्शन मात्र से काल सर्प योग निवारण हो जाता है। गाय के पीछे के पैरों के खुरों के दर्शन करने मात्र से कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है। ** गाय की प्रदक्षिणा करने से चारों धाम के दर्शन लाभ प्राप्त होता है,क्योंकि गाय के पैरों में चारो धाम है।

** जिस प्रकार पीपल का वृक्ष एवं तुलसी का पौधा आक्सीजन छोड़ते है। एक छोटा चम्मच देसी गाय का घी जलते हुए कंडे पर डाला जाए तो एक टन ऑक्सीजन बनती है। इसलिए हमारे यहां यज्ञ हवन अग्नि -होम में गाय का ही घी उपयोग में लिया जाता है। प्रदूषण को दूर करने का इससे अच्छा और कोई साधन नहीं है।

**धार्मिक ग्रंथों में लिखा है “गावो विश्वस्य मातर:” अर्थात गाय विश्व की माता है। गौ माता की रीढ़ की हड्डी में सूर्य नाड़ी एवं केतुनाड़ी साथ हुआ करती है, गौमाता जब धुप में निकलती है तो सूर्य का प्रकाश गौमाता की रीढ़ हड्डी पर पड़ने से घर्षण द्धारा केरोटिन नाम का पदार्थ बनता है जिसे स्वर्णक्षार कहते हैं। यह पदार्थ नीचे आकर दूध में मिलकर उसे हल्का पीला बनाता है। इसी कारण गाय का दूध हल्का पीला नजर आता है। इसे पीने से बुद्धि का तीव्र विकास होता है।

** जब हम किसी अत्यंत अनिवार्य कार्य से बाहर जा रहे हों सामने गाय माता के इस प्रकार दर्शन हो जब वह अपने बछड़े या बछिया को दूध पिला रही हो तो समझ जाना चाहिए की जिस काम के लिए हम निकले हैं वह कार्य अब निश्चित ही पूर्ण होगा। **गौ माता का जंगल से घर वापस लौटने का संध्या का समय (गोधूलि वेला) अत्यंत शुभ एवं पवित्र है। गाय का मूत्र गो औषधि है। मां शब्द की उत्पत्ति गौ मुख से हुई है। मानव समाज में भी मां शब्द कहना गाय से सीखा है। जब गौ वत्स रंभाता है तो मां शब्द गुंजायमान होता है।

** गौ-शाला में बैठकर किए गए यज्ञ हवन ,जप-तप का फल कई गुना मिलता है। बच्चों को नजर लग जाने पर, गौ माता की पूंछ से बच्चों को झाड़े जाने से नजर उत्तर जाती है, इसका उदाहरण ग्रंथों में भी पढ़ने को मिलता है, जब पूतना उद्धार में भगवान कृष्ण को नजर लग जाने पर गाय की पूंछ से नजर उतारी गई।

**गौ के गोबर से लीपने पर स्थान पवित्र होता है।गौ-मूत्र का पवन ग्रंथों में अथर्ववेद, चरकसहिंता, राजतिपटु, बाण भट्ट, अमृत सागर, भाव सागर, सश्रुतु संहिता में सुंदर वर्णन किया गया है।

**काली गाय का दूध त्रिदोष नाशक सर्वोत्तम है। रुसी वैज्ञानिक शिरोविच ने कहा था कि गाय का दूध में रेडियो विकिरण से रक्षा करने की सर्वाधिक शक्ति होती है। गाय का दूध एक ऐसा भोजन है, जिसमें प्रोटीन कार्बोहाइड्रेड, दुग्ध, शर्करा, खनिज लवण वसा आदि मनुष्य शरीर के पोषक तत्व भरपूर पाए जाते है। गाय का दूध रसायन का करता है।

**आज भी कई घरों में गाय की पहली रोटी निकाली जाती है। कई स्थानों पर संस्थाएं गौशाला बनाकर पुनीत कार्य कर रही है, जो कि प्रशंसनीय कार्य है। साथ ही यांत्रिक कत्लखानों को बंद करने का आंदोलन, मांस निर्यात नीति का पुरजोर विरोध एवं गौ रक्षा पालन संवर्धन हेतु सामाजिक धार्मिक संस्थाएं एवं सेवा भावी लोग लगातार संघर्षरत है। दुःख इस बात का भी होता है कि लोग गाय को आवारा भटकने के लिए बाजारों में छोड़ देते है। उन्हें इनके भूख प्यास की कोई चिंता ही नहीं होती। लोगों को चाहिए की यदि गाय पालने का शौक है तो उनकी देखभाल भी आवश्यक है, क्योंकि गाय हमारी माता है गौ रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है।

शिक्षित भारत सम्पन भारत!!

ग्रामीण भारत का औधोगीकीकरण!!

यही है विकास का सही चरण!!

मित्रों हमारा भारत कृषि प्रधान देश है 70% लोग गाँव मे ही रहते हैं किसी किसान के पास 5-10 एकड़ से भी कम जमीन है ऐसे किसानों की संख्या 50% से अधिक है जो आर्थिक रूप से बहुत ही पिछड़े हुए है, पूरा परिवार रात दिन मेहनत करने के बाद भी कर्जदार ही रहता है क्योंकि वह आधुनिक कृषि यन्त्र तथा तकनीकी जानकारी नही जुटा पाता है इसका उपाय केवल सामूहिक खेती से ही सम्भव हो सकता है,

जैसे कि सफेद क्रांति सामूहिक डेयरी व्यवसाय,,,

गाँव में हर परिवार के पास 2-3 दुधारू पशु अवश्य ही होते हैं, पूरा परिवार उनकी सेवा में लगा रहता है जिससे खर्चा ज्यादा होता है आमदनी कम ही होती है पशुओं को घर पर ही रखने से वातावरण में गन्दगी रहती है जिससे बीमारी भी ज्यादा ही होती है सामुहिक गौशाला में रखरखाव का खर्चा कम होता है तथा बीमारी भी कम ही होती है दूधारू पशु दूध ज्यादा देते हैं जिससे किसानों की आमदनी में बढ़त हो सकती है इसके लिए कुछ महिलाओ को मानदेय पर नियुक्त किया जा सकता है पशुशाला की स्थापना का कार्य मनरेगा के अंतर्गत कराया जा सकता है

देशभर में 100 करोड़ बांस पौधे लगाने का “लक्ष्य प्राप्ति 10 साल”

हर तहसील में 2 लाख हर गौशाला में10000 पौधे लगाने का लक्ष्य

तहसील स्तर की हर तहसील में 1 स्थानीय धार्मिक संस्था को गौशाला सुरक्षा के लिए मिल सकता है,

1-हर गौशाला में (CRASMIB-Trust) तथा जन सहयोग से 20 एकड़ भूमी पर 10000 बांस पौधे लगने के चार साल बाद फसल पर प्रति पौधा आमदनी 250/-X 10000=25,00,000/-सालाना मिलेगा.

2-गौशाला में पौधे लगने के बाद चार साल तक प्रति एकड़ Rs.5000/-X20 एकड़ =100.000/- सालाना मिलेगा.

3-तहसील में लगने वाले हर बांस पौधे पर CSR फंड1/-प्रति पौधा X 2 लाख =2 लाख रूपये एक बार मिलेगा.

4-तहसील में बांस लगने के चार साल बाद फसल पर CSR फंड 1/-प्रति पौधा X 2 लाख =2 लाख सालाना मिलेगा.

इस परियोजना से गौशालाओ का होगा विकास भक्तों को मिलेगा सुंदर वातावरण लाखों युवाओं को मिलेगा रोजगार जो देश के विकास में योगदान दे सकते हैं…

बांस पौधा रोपण में आपका सहयोग लाखों गायो का जीवन बचा सकता है. हर पंचायत में 50000 हर गौशाला में 5000 पौधे लगाने का लक्ष्य

पंचायत स्तर की तहसील वार 10 स्थानीय धार्मिक संस्था को हर गौशाला सुरक्षा के लिए मिल सकता है

1-हर गौशाला में (CRASMIB-Trust) तथा जन सहयोग से 10 एकड़ भूमी पर 5000 बांस पौधे लगने के चार साल बाद फसल पर प्रति पौधा आमदनी 250/-X 5000=1250000/-सालाना,

2-गौशाला में पौधे लगने के बाद चार साल तक प्रति एकड़ Rs.5000/-X10 एकड़ =50 हजार सालाना मिलेगा.

3-पंचायत में लगने वाले हर बांस पौधे पर CSR फंड 1/-प्रति पौधा X 50 हजार =50 हजार एक बार मिलेगा,

4-पंचायत में बांस लगने के चार साल बाद फसल पर CSR फंड 1/-प्रति पौधाX 50 हजार=50000/-सालाना

इस परियोजना से गौशालाओ का होगा विकास भक्तों को मिलेगा सुंदर वातावरण लाखों युवाओं को मिलेगा रोजगार जो देश के विकास में योगदान दे सकते हैं…

देशभर में 100 करोड़ बांस पौधे लगाने का “लक्ष्य प्राप्ति 10 साल”

पौधों की देखभाल के लिए 1,50,000 योग्य युवाओं को रोजगार मिल सकता है:-

1-प्रति 10 हजार पौधों के लिए एक केयर टेकर मानदेय @1.6 LPA पद 1,00,000

2-10 केयर टेकर के लिए एक फिल्ड सुपरवाइजर मानदेय @ 4.8 LPA पद 10,000

3-प्रति 5 सुपरवाइजर के लिए एक टीम लीडर मानदेय @ 10 LPA पद 2000

4-प्रति 5 टीम लीडर के लिए एक जिला प्रबन्धक मानदेय @20 LPA पद 400

इस परियोजना से लाखों युवा अपनी रोजी – रोटी कमाकर इस देश के विकास में योगदान दे सकेगा! अब फैसला है आपका…..

गौ माता है एक अनमोल रत्न.

गाय से हमें इतना सब कुछ मिल सकता है, गाय की सेवा करके जीवन सफल बनाएं गौमाता सबसे बड़ा धन! इसकी रक्षा करें हम!! आपका छोटा सा सहयोग गाय का जीवन बचा सकता है. आओ गौ सेवा अपनाएं! स्थाई रोजगार पाएं!

“पर्यावरण बचाओ, गाय बचाओ, मनचाहा स्थाई रोजगार पाओ”

गरीब शिक्षित होगा! भारत रोजगार युक्त होगा !!
युवाओं के पास रोजगार होगा! भारत सम्पन होगा !!

गरीब परिवारों को (CRASMIB-Trust) तथा जन सहयोग से रोजगार मिल सकता है पंचायत के 50 गरीब परिवार आपस में मिलकर दो दूधारू गाय तथा दो देशी गाय एक जगह रखें तो 200 गाय की एक गौशाला बन सकती है तथा 200 महिलाओं को स्वरोजगार मिल सकता है

आपका छोटा सा सहयोग गाय का जीवन बचा सकता है,,,

आओ गौ सेवा अपनाएं ! स्थाई रोजगार पाएं !

गौ माता व पर्यावरण को बांस पेड़ ही बचा सकता है “पर्यावरण बचाओ, गाय बचाओ, मनचाहा स्थाई रोजगार पाओ”

गौ माता व पर्यावरण को बांस पेड़ ही बचा सकता है. “पर्यावरण बचाओ, गाय बचाओ, मनचाहा स्थाई रोजगार पाओ”

गौ स्मृति वन आक्सीजन पार्क

One Acre 220X198 Fit =550 Bamboo Plants

“पर्यावरण बचाओ, गाय बचाओ, मनचाहा स्थाई रोजगार पाओ”

10 एकड़ गौ स्मृति वन आक्सीजन पार्क

One Acre 220X198 Fit = 550 Bamboo Plants

ten Acre = 9 farm house X 550 Plants = 4950 Bamboo Plants

CRASMIB की कृण्वन्तो विश्वायुर्वेदम आयुर्वेदीय परियोजना के तहत स्वस्थ जीवन की मंगलमय मनोकामना के साथ अपने परिवार जनों को निरामय-सुखायु जीवन जीने के लिए आयुर्वेद स्वस्थवृत प्रशिक्षण से जुड़ी हुई कुछ व्यवस्थाओं व चिकित्सा को मनुष्य जीवन की समस्याओं-कठिनाइयों के निराकरण को लेकर के चिंतन-मनन के बाद जटिलतम (Improbable) समस्याओं का समाधान लेकर आप लोगों को अपने प्रोग्राम्स और सतर्कता अभियान के तहत क्रमशः आप लोगों के बीच अपने विचार और औषधि को प्रेषित करने की आज्ञा और अनुमति चाहता हूं

CRASMIB की कृण्वन्तो विश्वायुर्वेदम आयुर्वेदीय परियोजना के तहत स्वस्थ जीवन की मंगलमय मनोकामना के साथ अपने परिवार जनों को निरामय-सुखायु जीवन जीने के लिए आयुर्वेद स्वस्थवृत प्रशिक्षण से जुड़ी हुई कुछ व्यवस्थाओं व चिकित्सा को मनुष्य जीवन की समस्याओं-कठिनाइयों के निराकरण को लेकर के चिंतन-मनन के बाद जटिलतम (Improbable) समस्याओं का समाधान लेकर आप लोगों को अपने प्रोग्राम्स और सतर्कता अभियान के तहत क्रमशः आप लोगों के बीच अपने विचार और औषधि को प्रेषित करने की आज्ञा और अनुमति चाहता हूं । नवाचरण मार्ग द्वारा आज की समस्या बढ़ती बेरोजगारी और बीमारी, दोनों को अपने बीच से MINI DOCTOR प्रशिक्षण कार्यक्रम में निकालने के लिए आयुर्वेद स्वस्थवृत अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहता हूं । गैस, एसिडिटी, मोटापा, थायराइड, शुगर, बीपी, कैंसर, जैसे असाध्य रोगों को आयुर्वेद से बड़ी आसानी से खत्म किया जा सकता है । ऐसे में हमारे इंटरनेशनल मार्केटिंग कारपोरेशन द्वारा हमारे बीच कुछ यूनिक प्रोडक्ट हमें CRASMIB अनुसंधान संस्थान के अमृत रूपी घट में निकले है ।

Note :- कैंसर कोई खतरनाक बीमारी नहीं है

आइये हमारे साथ हम सब मिलकर विश्व को कैंसर मुक्त बनायें!!

लापरवाही के अलावा कैंसर से किसी की मौत नहीं होनी चाहिए।

(1). पहला कदम चीनी का सेवन बंद करना है। आपके शरीर में चीनी के बिना, कैंसर कोशिकाएं स्वाभाविक रूप से मर जाती हैं।

(2). दूसरा कदम यह है कि एक कप गर्म पानी में नींबू का रस मिलाएं और इसे सुबह भोजन से पहले 1-3 महीने तक पिएं और कैंसर खत्म हो जाएगा। मैरीलैंड मेडिकल रिसर्च के अनुसार, गर्म नींबू पानी कीमोथेरेपी से 1000 गुना बेहतर, मजबूत और सुरक्षित है।

(3). तीसरा कदम है सुबह और रात को 3 बड़े चम्मच ऑर्गेनिक नारियल तेल पिएं, कैंसर गायब हो जाएगा, आप चीनी से परहेज सहित अन्य दो उपचारों में से कोई भी चुन सकते हैं। अज्ञानता एक बहाना नहीं है। अपने आस-पास के सभी लोगों को बताएं, कैंसर से मरना किसी के लिए भी अपमान है; जीवन बचाने के लिए व्यापक रूप से हमें साझा करें।

“मानवता के लिए हर मानव की स्वास्थ्य सेवा ही सनातन सेवा होगी”

देशभर के 540 जिलों में जिलेवार 25=13500 गौशालाओं में रोग प्रतिरोधक चिकित्सालय स्थापित करने की योजना है !

इस परियोजना से लाखों लोग स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं तथा लगभग@1,50,000 युवाओं को स्थाई रोजगार मिल सकता है !

गौशालाओं के लिए गोमूत्र का व्यवसाय (CRASMIB-Trust) के सहयोग से कम पैसे में गरीब युवाओ को आमदनी का सुनहरा अवसर।

गोमूत्र (गाय का मूत्र) पंचगव्यों में से एक है। जबकि गोमूत्र और गोबर का खाद के रूप में लाभ होता है, शोधकर्ता रोगों को ठीक करने के किसी भी अन्य दावे को खारिज करते हैं और इसे छद्म विज्ञान मानते हैं।[1][2][3] ब्रिटेन के डॉ. काफोड हैमिल्टन के अनुसार – गौमूत्र के उपयोग से हृदय रोग दूर होता है तथा पेशाब खुलकर होता है कुछ दिन तक गौमूत्र सेवन से धमनियों में रक्त का दबाव स्वाभाविक होने लगता हैं , गौमूत्र सेवन से भूख बढती है , यह पुराने चर्म रोग की उत्तम औषधि है। ब्रिटेन के अन्य चिकित्सक डॉक्टर सिमर्स कहते हैं कि गौमूत्र रक्त में बहने वाले दूषित कीटाणुओं का नाश करता है ।[4] आयुर्वेद के अनुसार, गोमूत्र कुष्ठ रोग, बुखार, पेप्टिक अल्सर, यकृत रोग, किडनी विकार, अस्थमा, कुछ एलर्जी, सोरायसिस, एनीमिया और यहां तक ​​कि कैंसर का इलाज कर सकता है।[5][6] आधुनिक शोध के अनुसार भी वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि गोमूत्र मे कैंसर रोधी गुण होते हैं। यह कैंसर के खतरे को रोकने का काम करता है।

गोमूत्र पान एक ऐसी प्रथा है जिसका पारम्परिक रूप से कुछ संस्कृतियों में, विशेषकर भारत में, सदियों से पालन किया जाता रहा है। बौद्ध संघ मे गोमूत्र का सेवन करना श्रामणेतरों के लिए अनिवार्य नियम था। भगवान बुद्ध द्वारा भिक्षुओं को पाण्डु रोग से ग्रसित होने पर औषधि के रूप में गोमूत्र की हर्रे पिलाने का वर्णन विनय पिटक के महावग्ग में आता है।[ बौद्ध ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि श्रमण गोमूत्र में शोधित की गई हर्र सदैव अपने पास रखते थे । वायु विकार या पाचन संबंधी किसी भी प्रकार के कष्ट में वे इसे जल के साथ निगल जाते थे । हर्र एक ऐसी औषधि थी जो पूर्व काल से ही प्रचलित थी और रक्त शोधक , पाचक तथा रोगप्रतिरोधक की तरह उपयोग में लायी जाती थी । गोमूत्र की भावना देकर शोधन करने से हर्र में शरीर के सभी मुख्य तंत्रों की प्रणाली को सम करने गुण आ जाते थे । आयुर्वेद में पांडुरोग चिकित्सा एवं गलशुण्डी या टांसिलाइटिस मे गोमुत्र उपयोगी है। गोमूत्र सेवन के समर्थकों का दावा है कि इसके औषधीय और स्वास्थ्य लाभ हैं। यद्यपि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि इन दावों का समर्थन करने हेतु कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। वास्तव में, गोमूत्र के सेवन से सम्भावित स्वास्थ्य संकट जुड़े हैं।

गोमूत्र का व्यवसाय (CRASMIB-Trust) के सहयोग से कम पैसे में आमदनी का सुनहरा अवसर।

गोमूत्र में यूरिया, क्रिएटिनिन और पोटैसियम, कैल्सियम और मैग्नीसियम जैसे खनिजों सहित कई यौगिक होते हैं। यद्यपि, इसमें हानिकारक पदार्थ जैसे जीवाणु और विषाक्त पदार्थ भी होते हैं जो मानव स्वास्थ्य हेतु हानिकारक हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, गोमूत्र एक बन्ध्य तरल नहीं है, और इसमें कई प्रकार के दूषित पदार्थ हो सकते हैं, जिनमें ई. कोलाई, साल्मोनेला और अन्य रोगजनकों शामिल हैं। दूषित गोमूत्र पीने से संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। गोमूत्र में भारी धातुओं और कीटनाशकों के उच्च स्तर हो सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि गायों को किस वातावरण में पाला जाता है और वे क्या खाते हैं। ये विषाक्त पदार्थ समय के साथ शरीर में जमा हो सकते हैं और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न कर सकते हैं। अन्ततः स्वास्थ्य उद्देश्यों हेतु गोमूत्र का सेवन करने की अनुशंसा नहीं की जाती है, और किसी भी कथित स्वास्थ्य लाभ हेतु वैकल्पिक तरीकों की खोज की जानी चाहिए।

गोमूत्र का उपयोग

कृषि में गोमूत्र का प्रयोग : वर्तमान मानव जीवन कृषि में रासायनिक खादों के प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों को झेल रहा है। रासायनिक खादों से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ फैल रही हैं। ऐसे में गोमूत्र एवं अन्य अपशिष्ट वैकल्पिक खाद और कीटनाशक के रूप में सामने आ रहे हैं। गोमूत्र के औषधीय प्रयोग : हजारों वर्ष पहले लिखे गए आयुर्वेद में गोमूत्र को अमृत सदृश माना गया है। वर्तमान वैज्ञानिक युग में भी गोमूत्र को जैविक औषधीय विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

  • गोमूत्र पानी में डालकर नहाने से सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है एवं गंगा में नहाने का फल प्राप्त होता है।
  • 15 ग्राम गोमूत्र आधे गिलास पानी में मिलाकर पीने से शरीर की गंदगी दूर हो जाती है।
  • दो पीपल के पत्तों को पानी में उबालकर 15 ग्राम गोमूत्र मिलाकर पीने से हृदय के सभी रोग दूर हो जाते है।
  • गोमूत्र में त्रिफला मिलकर उपयोग करने से बात पित्त कफ तीनों दोस बैलेंस रहते हैं शरीर निरोगी रहता है।
  • गृह सफाई में गोमूत्र के प्रयोग : हिंदुओं की प्राचीन परंपरा के लिहाज से गोमूत्र एक पवित्र एवं उपयोगी द्रव है।
  • गोमूत्र को अब फिनायल की जगह प्रयोग करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
  • “पर्यावरण बचाओ, गाय बचाओ, मनचाहा स्थाई रोजगार पाओ” गौशालाओं के लिए गोबर सुखाने का व्यवसाय (CRASMIB-Trust) के सहयोग से कम पैसे में गरीब युवाओ को आमदनी का सुनहरा अवसर।

    एक टन ताजा गोबर से लगभग 300 किलोग्राम सूखा गोबर मिल सकता है

    सूखा गोबर कई व्यवसायों के लिए एक बहुमूल्य उत्पाद है, जिसमें सीमेंट, ईंट व पेंट जैविक खाद, गोकाष्ठ लकड़ी, गोबर से बनी धूपबत्ती, गोबर के गमले बनाना शामिल हैं। गोबर सुखाने के लिए मशीनों का उपयोग किया जा सकता है और इस व्यवसाय में सरकारी सब्सिडी का भी लाभ उठाया जा सकता है।

    व्यवसाय के विचार

    गोबर की खाद (जैविक उर्वरक): गोबर को सुखाकर और दानेदार बनाकर जैविक खाद बनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल की पैदावार में वृद्धि होती है।

    गोकाष्ठ लकड़ी: गोबर, सूखा भूसा और घास मिलाकर गोकाष्ठ लकड़ी बनाई जाती है, जिसका उपयोग दाह संस्कार में ईंधन के रूप में किया जाता है और इससे कमाई होती है।

    धूपबत्ती और अगरबत्ती: गोबर से बनी धूपबत्तियां पवित्र मानी जाती हैं और इनकी बाजार में अच्छी मांग है, खासकर पूजा-पाठ में इस्तेमाल के लिए।

    गोबर के गमले: बारिश के मौसम में गोबर से बने बड़े गमलों की मांग रहती है, और जब ये गल जाते हैं तो इन्हें खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

    जरूरी चीज़ें

    1-गोबर सुखाने की मशीन: गोबर से नमी हटाने और उसे सुखाने के लिए मशीनें उपलब्ध हैं।

    2-सूखे भूसे और घास की उपलब्धता: गोकाष्ठ लकड़ी बनाने के लिए ग्रामीण इलाकों में ये मिल जाती हैं।

    सब्सिडी का लाभ उठाएं:

    सरकार गोबर आधारित व्यवसायों के लिए सब्सिडी प्रदान करती है, जिसका लाभ उठाएं।

    व्यापार के लिए गोबर के उत्पाद:

    गोबर की लकड़ी (गोकाष्ठ): गाय के गोबर में सूखा भूसा और घास मिलाकर लकड़ी तैयार की जाती है, जिसका इस्तेमाल दाह संस्कार में ईंधन के रूप में होता है। यह एक अच्छा और मुनाफ़े वाला व्यापार साबित हो रहा है।

    गोबर से बने गमले: बारिश के मौसम में गमलों की मांग बढ़ जाती है। गोबर से बने गमले पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और जब गलते हैं, तो खाद का काम करते हैं।

    गोबर से बनी धूपबत्ती: ये धूपबत्तियाँ बाज़ार में खूब बिक रही हैं क्योंकि गाय के गोबर को पवित्र माना जाता है और इसका उपयोग पूजा स्थलों पर भी किया जाता है।

    जैविक खाद (उर्वरक): गाय के गोबर से बनी जैविक खाद मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ाती है और फसल की पैदावार में सुधार करती है। इसके लिए गोबर को सुखाकर छोटे दाने (गोलीनुमा) बनाए जाते हैं, जानकारी के अनुसार यह ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर मशीनें भी उपलब्ध हैं।

    व्यापार की प्रक्रिया और बिक्री:

    कच्चा माल जुटाना: ग्रामीण इलाकों में गोबर आसानी से उपलब्ध होता है।

    उत्पाद बनाना: आप अपनी पसंद के उत्पाद (लकड़ी, गमले, धूपबत्ती या खाद) बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

    मशीनरी का उपयोग: गोबर को सुखाने और दानेदार बनाने के लिए गोबर सुखाने की मशीनें उपलब्ध हैं, गोबर की लकड़ी बनाने के लिए मशीनें भी बाज़ार में उपलब्ध हैं.

    एक बार गोबर सूख जाने के बाद, उसका पाउडर, कंडे, जैविक खाद, गोबर के गमले, गोबर की टाइल्स, धूपबत्ती, गमले, या गोबर की लकड़ी (गोकाष्ठ) बनाकर उसे बेच सकते हैं, जो दाह संस्कार में उपयोग होती है और जिसकी बाज़ार में अच्छी मांग है। इसके अलावा, जैविक खाद जो मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करती है, फसल की उपज बढ़ाती है। भी बना सकते हैं,

    देसी गाय के गोबर का फेशियल पाउडर

    भारत में देसी गाय के गोबर फेशियल पाउडर का निर्माण, निर्यात, वितरण और आपूर्ति करते हैं। प्राकृतिक चमक का उपयोग करने के लिए उत्पाद, यह एक जैविक चेहरे का उत्पाद है, इस उत्पाद में कोई रसायन नहीं है, जो सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त है, जो जड़ी-बूटियों के साथ हमारी पारंपरिक विधि द्वारा निर्मित है।

    अब आप गाय के गोबर से मुनाफ़े वाला कंडे बनाने का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं

    गोबर से पेंट बनाने का व्यवसाय (CRASMIB-Trust) के सहयोग से शुरू कर सकते हैं

    प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए कुल खर्चा और मुनाफा

    डिस्टेंपर पेंट बनाने के लिए प्रति किलो 40 से 45 रुपये और पैकेजिंग खर्च 16 से 20 रुपये आता है। इसलिए कुल लागत 56 से 65 रुपये प्रति किलो होती है जिसे मार्केट में 120 रुपये प्रति किलो बेचा जाता है। इसी तरह डिस्टेंपर पेंट से 55 से 65 रुपये प्रति किलो मुनाफा कमा सकते हैं।

    वही पर इमल्शन पेंट बनाने के लिए खर्चा 70 से 75/- प्रति लीटर और पैकेजिंग खर्च 16/- से 20/- होता है। इसी तरह इसकी कुल लागत 86 से 95/-प्रति लीटर होती है जिसे बाजार में 225/-प्रति लीटर पर बेचा जाता है। इमल्शन पेंट से आप 130 से 139/-प्रति लीटर कमा सकते हैं।

    पेंट बनाने के लिए जरूरी सामग्री और उनकी कीमत इसको बनाने के लिए आपको गाय के गोबर की जरूरत तो होगी ही साथ में पिगमेंट कलर, थिक्नर, बाइंडर और अन्य एडिटिव्स की भी आवश्यकता होगी।
  • * डबल डिस्क रिफाइनर जिसकी कीमत175000 रुपये है।
  • * ट्विन शिफ्ट मशीन जिसकी कीमत 4 लाख रुपये है।
  • * पग मिल मशीन की कीमत 2 लाख रुपये है।
  • * बीड़ मिल मशीन की कीमत साडे 3.5 लाख रुपये हैं।
  • * पैकेजिंग मैटेरियल जैसे की पेंट बकेट आदि की भी जरूरत होगी। इस तरह आप का कुल निवेश करीबन 12 लाख रुपये होगा।
  • कैंसर कोई खतरनाक बीमारी नहीं है आइये हमारे साथ हम सब मिलकर विश्व को कैंसर मुक्त बनायें!!

    हमारी महत्वपूर्ण परियोजनायें

    1- औषधीय सहायता संबंधी विदाउट ओ नीति-कृषि का नया स्वरूप?

    2. रोगों के प्रबंधन की लागत: विभिन्न उपचारों का तुलनात्मक अध्ययन करना।

    3. वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य पैटर्न के आयुर्वेद केंद्र (ACHPAM) की स्थापना करना ।

    4. सभी जिलों में ROPPK-NESTA-गुरुकुल-गौशाला कुटीर उद्योग के माध्यम से स्वरोजगार।

    5.औषधीय पौधों की खेती और आयुर्वेद औषधियों की तैयारी में उनके उपयोग के साथ पर्यावरण सुरक्षा के लिए बांस की खेती को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण परियोजनायें हैं।

    इस परियोजना में विस्तार के लिए लाखों युवा योगदान दे सकते हैं